डॉ.आर. लाल गुप्ता
जिले के पोखरामा हाई स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में कार्यरत शिक्षक एवं साहित्यकार आशीष कुमार सिन्हा द्वारा रचित ‘लखीसराय गीत’ इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को समर्पित यह गीत फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लोगों की विशेष पसंद बन गया है। गीत को हजारों लोगों द्वारा साझा किया जा चुका है, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसकी सराहना करते हुए सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लखीसराय जिले की पहचान से जुड़े प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों का अत्यंत प्रभावशाली और भावनात्मक शब्दों में वर्णन किया गया है। गीत में विश्वप्रसिद्ध श्रृंगी ऋषि धाम, अशोक धाम, माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, गौरी शंकर धाम, लाली पहाड़ी, ज्वालप्पा स्थान, उरैन की बौद्ध विरासत, लय, अरमा सहित जिले के अनेक महत्वपूर्ण स्थलों का उल्लेख किया गया है। रचनाकार ने इन स्थानों की ऐतिहासिक महत्ता और सांस्कृतिक पहचान को गीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
गीत में लखीसराय को केवल एक प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि उसकी प्राचीन पहचान ‘कृमिला’ के रूप में संबोधित किया गया है। इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन काल में इस क्षेत्र को कृमिला नाम से जाना जाता था। रचनाकार ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को गीत में स्थान देकर जिले के गौरवशाली अतीत को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस गीत को सुनने वाले लोग इसे लखीसराय की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत दस्तावेज बता रहे हैं। स्थानीय बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, साहित्यकारों और युवाओं का कहना है कि गीत जिले की पहचान, गौरव और ऐतिहासिक विरासत को सहज एवं आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि यह रचना लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। साहित्यिक जानकारों का मानना है कि किसी जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को गीत के माध्यम से प्रस्तुत करना आसान कार्य नहीं होता, लेकिन आशीष कुमार सिन्हा ने अपने शब्दों और भावों के माध्यम से लखीसराय की आत्मा को अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है। गीत में धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक गौरव और स्थानीय संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी आशीष कुमार सिन्हा द्वारा रचित ‘बिहार गीत’ सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था और उसे भी लोगों का व्यापक समर्थन मिला था। अब ‘लखीसराय गीत’ की लोकप्रियता ने एक बार फिर उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जिला प्रशासन इस गीत को जिले के पर्यटन, सांस्कृतिक प्रचार-प्रसार और ब्रांडिंग से जोड़कर आगे बढ़ाए तो यह लखीसराय की पहचान को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिलहाल यह गीत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और जिले की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।






































