कजरा/लखीसराय,
डा आर लाल गुप्ता
तू ही निरंकार की करतल ध्वनि से आध्यात्मिक मिशन अंतरराष्ट्रीय धरा पर पल्लवित हो अपनी पहचान बना चुका है जिसकी नींब बाबा बुटा सिंह ने 25 मई को 1929 इंसानों के ज़ेहन में डाली थी।वह स्थान पेशावर थी जो अभी पाकिस्तान में है। इनके बाद निरंकारी मिशन के सदगुरु बाबा अवतार सिंह जी हुए। जिन्होंने संत निरंकारी मिशन का आध्यात्मिक पंजीकरण भी करवाया और उन्होंने अवतार वाणी नामक चौपाईयों के साथ इस निर्गुण निराकार का वर्णन किया जो आज भी काफी लोकप्रिय है। अवतार वाणी के चौपाई के गान के साथ निरंकारी मिशन का सत्संग का शुभारंभ किया जाता है।
बाबा अवतार सिंह जी के बाद बाबा गुरुवचन सिंह जी,फिर बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, इनके बाद माता सविंदर हरदेव सिंह जी और वर्तमान में माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव सिंह जी निरंकारी मिशन के गुरु माता हैं।
संत निरंकारी मिशन विश्व में अज्ञानता, अंधविश्वास, बैर बिषाद से उपर उठकर एक नूर का उपजा सब कोई यानी सारे मनुष्य के भीतर एक हीं आत्मा है इसलिए जाति मज़हब के नाम पर नफ़रत के बजाय बंधुत्व का अहसास में जीने की प्रेरणा देती है जो मानवता के लिए अति आवश्यक है।
कजरा निरंकारी मिशन के शाखा के मुखी महात्मा त्रिलोकी जी ने आयोजित सत्संग में उपस्थित श्रद्धालुओं को उक्त जानकारी दिया। आगामी 31 जुलाई शुक्रवार को जमालपुर गायत्री मंदिर के निकट धर्मशाला में वहां के मुखी महात्मा सूर्यमणि गौतम जी उर्फ टीटी साहब के अगुआई में खुला सत्संग का आयोजन 10.00बजे 2.00 तक लंगर के साथ निरंकारी सत्संग का आयोजन किया जाएगा जिसकी जानकारी देते हुए अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने का विनती किया गया। वहीं गुरु गद्दी पर बड़हिया से पधारे महापुरुष विपीन सिंह जी एवं मंच संचालन समर्पित महापुरुष रामकरण पंडित के द्वारा की गई। जिसमें दर्जनों भाई बहनों ने इस निरंकार का स्मरण करते हुए विश्व के कल्याण के लिए सदगुरु माता जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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अध्यात्मिकता, वैज्ञानिकता, समरसता का द्योतक है निरंकारी मिशन
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