(125 यूनिट मुफ्त बिजली बना छलावा)
लखीसराय/ कजरा,
डॉ.आर.लाल गुप्ता
24 घंटे के दिन रात में तकरीबन 6 से 7 घंटे बिजली की उपलब्धता नहीं रहने के कारण आम लोगों को दिन का चैन व रातों का नींद छीन गया है।
विशेषकर बयोवृद्ध एवं बच्चे जिस घर में हैं उनके लिए बिजली की कटौती तो काफी कष्टकारक है।
आज के तारीख में लोग लालटेन युग की परिकल्पना से लोग काफी दूर हैं परंतु बिजली की निर्बाध सप्लाई नहीं होने से कष्ट में रहने को मजबूर भी हैं।
बिहार में गरीबता की प्रतिशत देखा जाए तो 2023 की जाति जनगणना में 33 पॉइंट 13 परसेंट के लगभग लोग गरीब है। जिनकी मासिक आय का मात्र ₹6000 ही है। सरकार पिछली पंक्ति में खड़े लोगो को विकास की बात करती है। यह फ़ाइलों मे सिमटी घोषणा मात्र माना जाएगा जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।
ऐसे में यह बिजली के जगह पर इनवर्टर अथवा जनरेटर की कल्पना क्यों नहीं कर सकते और इस भीषण गर्मी में बिजली की कटौती पूर्ण गरीब परिवारों के लिए काफी दुश्वार है। बिजली की इतनी ज्यादा कटौती किसी को भी पसंद नहीं है।
हिमांशु कुमार, सनी पटेल, बंटी कुमार, पवन कुमार, सुमित कुमार, रिशु कुमार, दिवाकर सिंह, दिवाकर झा सहित दर्जनों लोगों ने बताया की बिजली का बिल जब हम सब समय भुगतान करते हैं तो आखिर बिजली की कटौती क्यों। उन्होंने विभाग से निर्बाध बिजली की आपूर्ति करने का मांग किया है।
लोगों ने कहा कि 125 यूनिट बिजली मुफ़्त में देना सरकार का छलावा घोषणा नहीं तो और क्या है।जबकि व्यवसाई बिजली कर और घरेलू बिजली कर हर स्थिति में लोग भुगतान करते ही करते हैं। फिर सरकार का राजस्व का स्तर इतना गिर गया है कि अपने राज्य के जनता को आज के जरूरतों में शुमार बिजली की आपूर्ति में कटौती कर राजस्व को संतुलित करना चाहती है। जनता के इस प्रश्न का जवाब सरकार को आज नहीं तो कल देना ही होगा।
बेशक शराब का इस्तेमाल सामाजिक अपराध व सामाजिक कुरीति है परंतु बिजली की कटौती को सामाजिक प्रसाद व वरदान भी तो नहीं माना जाना चाहिए।
इसलिए लोगो ने बिहार की नई सरकार से बिजली की कटौती के बजाय बिजली की बेहतर आपूर्ति के लिए गुहार लगाया है।
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बिजली की आंख मिचौली से छीन गया चैन
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